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उस सकुं को पहचान ले।

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हैं अभी वक़्त तू थाम ले,भूल दिमाग ज़रा दिल से काम ले।
वो जो मिलता नहीं तुझे ढूंढने से,उस सकुं को पहचान ले।
निकल खुद से कहीं दूर,निकल खुद से कहीं दूर,.
ज़रा खुले आसमां में सांस ले।
बन्द हो गई हैं जो शक़्सियत तेरी इन कमरों-बिल्डिंगों में,
छोड़ कम्प्यूटर-लैपटॉप,ज़रा हवाओं को थाम लें।
इंतज़ार में हैं कहीं तू खुद,खुदी के,,
इंतज़ार में हैं कहीं तू खुद,खुदी के..
निकल राहों पे बेफिक्र उन मंज़िलों को पहचान ले।
नहीं हैं परवाह ज़माने को तेरी ये कब तक नज़रंदाज़ करेगा,
तू उठा नज़रें और आसमां को बाहों से नाप लें।
खुशियां देने से बढ़ती हैं तेरा दिल जानता हैं,
वक़्त ये ही हैं कर अमल और ज़रा दिमाग को आराम दें।
उड़ते पक्षियों को देख कब तक सकुं मिलेगा,
निकाल पंख अपने एक नयी उड़ान ले।
दे कुछ ऐसा किसी को कि तेरा भी सुख बड़े,
हसी आये जब चहरे पे उसके तो तुझे भी सकुं मिले।
हैं अभी वक़्त तू थाम ले,भूल दिमाग ज़रा दिल से काम ले।
वो जो मिलता नहीं तुझे ढूंढने से,उस सकुं को पहचान ले।

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