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उस सकुं को पहचान ले।

हैं अभी वक़्त तू थाम ले,भूल दिमाग ज़रा दिल से काम ले।
वो जो मिलता नहीं तुझे ढूंढने से,उस सकुं को पहचान ले।
निकल खुद से कहीं दूर,निकल खुद से कहीं दूर,.
ज़रा खुले आसमां में सांस ले।
बन्द हो गई हैं जो शक़्सियत तेरी इन कमरों-बिल्डिंगों में,
छोड़ कम्प्यूटर-लैपटॉप,ज़रा हवाओं को थाम लें।
इंतज़ार में हैं कहीं तू खुद,खुदी के,,
इंतज़ार में हैं कहीं तू खुद,खुदी के..
निकल राहों पे बेफिक्र उन मंज़िलों को पहचान ले।

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Definitely that was not the last time!

English

Generally, I'd go more than thousand kilometers away from my boring daily life to figure out someone else's daily life. The Himalayan mountain ranges are over 1500 kms from my hometown Jamshedpur. Whenever I need a break, I go there. I was going to Bhauniyara this time to meet Anita and see her school. The ropeway at Tipri apparently starts at 10am. I arrived early and got down at Pipal Dali.....

Hindi

सामान्य तौर पर मैं हजार किलोमीटर से भी अधिक दूर चला जाता हूँ ताकि अपनी नीरस और उबाऊ दिनचर्या से निकल कर दूसरों की दिनचर्या की गुत्थियाँ देख सकूँ। हिमालय की पर्वत-शृंखलाएँ मेरे शहर जमशेदपुर से लगभग 1500 किलोमीटर दूर हैं। अवकाश के लिए मैं वहीं चला जाया करता हूँ। इस बार मैं अनीता जी का विद्यालय देखने भौनियाड़ा जा रहा था। टिपरी रज्जु-मार्ग (रोप वे) की सेवा 10 बजे से शुरू होती है। मैं पहले पहुँच गया था और पीपल डाली पर बस से उतर गया था। ....

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कुछ मन्ज़िले तो ज़रूर होंगी !

 
कुछ मन्ज़िले तो ज़रूर होंगी जो मेरे इन्तज़ार में होंगी,
कुछ तो राहें होंगी जो मेरे कदमों के लिए बेकरार होंगी।
कहीं तो सकुं रुका हुआ किसी मंज़िल पे मेरा इंतज़ार करता होगा,
कहीं तो नज़ारों में मेरे ख्यालों का घर बना होगा।
कहीं तो इस शहर से दूर किसी गाँव में मेरा ठिकाना होगा,
दिल कहता हैं उसकी तलाश में कभी तो मुझे जाना होगा।
सोच गर् सोच ही बनी रही तो वो मक़ाम कहां हासिल होगा,

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कोई सफ़र यूं भी करू !

कोई सफ़र यूं भी करू की छोड़ बड़ा कुछ छोटा करू।
दूर निकल पहाड़ो में भीड़ से दूर गाँवों में किसी की खुशी बनू।
न दूं पैसा न कोई सामान पर दिल से दिल को कुछ ऐसा दूं,
बदल न सके बेशक़ ज़िन्दगी पर उसे आगे बढ़ने का हौसला दूं.. पर उसे आगे बढ़ने का हौसला दूं।
मैं कब तक मैं बन जियूं,

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