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आनंदवाटिका ग्रीन गुरुकुलम का उत्साहवर्द्धक एक वर्ष!

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उत्तराखंड के जनपद टिहरी गढ़वाल में प्रतापनगर-धारमंडल क्षेत्र के मदननेगी में रक्षाबंधन त्यौहार के दिन 18 अगस्त 2016 को स्थापित आनंदवाटिका ग्रीन गुरुकुलम (एवीजीजी) एक वर्ष पूरा करने जा रहा है. शिक्षाविद अनीता नौटियाल तथा वरिष्ठ पत्रकार और सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता सुरेश नौटियाल ने आनंदवाटिका ग्रीन गुरुकुलम नाम से यह अनौपचारिक विद्यालय आरंभ किया था. “बियोंड द वाल्स एंड अहेड ऑव द सिलेबी” अर्थात “स्कूल और पाठ्यक्रम के अतिरिक्त शिक्षा” की इस अवधारणा को अनौपचारिक किन्तु सार्थक ढंग से क्रियान्वित करने का विचार श्रीमती अनीता नौटियाल के मन-मस्तिष्क में वर्षों पहले से ही था किंतु यह साकार हुआ 18 अगस्त 2016 को.

यह बीज अगले दिन 19 अगस्त को ही पौधे के रूप सामने आ गया, अर्थात पठान-पाठन का कार्य इस दिन आरंभ हो गया. स्कूल को धरातल पर लाने में आरंभिक स्तर पर कुछ स्थानीय शिक्षकों और लोगों का सराहनीय योगदान रहा. पहले दिन ही 21 बच्चे पहुंचे जो एलकेजी से लेकर नौवीं कक्षा के छात्र थे और इनमें अधिसंख्य बालिकाएं थीं. चार दिन के भीतर यह संख्या 49 तक पहुंच गयी थी. बच्चों को प्रथम दिवस ही बता दिया गया था कि आनंदवाटिका का उद्देश्य ऐसी शिक्षा देने का है जो उनके दैनिक जीवन में काम आ सके. छात्रों को अंग्रेजी कैलीग्राफी, शब्द-ज्ञान के साथ-साथ सामान्य ज्ञान इत्यादि की शिक्षा दी गयी और यह क्रम निरंतर आगे बढ़ा.

“बियोंड द वाल्स एंड अहेड ऑव द सिलेबी” अर्थात “स्कूल और पाठ्यक्रम के अतिरिक्त शिक्षा” की इस अवधारणा या पद्ध्वति का अर्थ यह भी होता है कि जो शिक्षा स्कूलों में और पाठ्यक्रमों के माध्यम से नहीं दी जाती है, उसे आनंदवाटिका ग्रीन गुरूकुलम देने का प्रयास कर रहा है ताकि आने वाले समय में हम सब मिलकर अच्छे नागरिक तैयार कर सकें.

कुछ स्वार्थी और राजनीति से प्रेरित लोगों ने इस प्रयास को निरुत्साहित करने का प्रयास किया. उन्हें लगा कि यदि बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा मिलने लगेगी तब उनके ट्यूशन के धंधे का क्या होगा. आनंदवाटिका के निस्वार्थ प्रयास के लिए यह अच्छी बात साबित नहीं हुयी. मदननेगी के पश्चात जलवालगांव में छोटे बच्चों को पढ़ाने का कार्य आरंभ हुआ लेकिन स्वार्थी तत्वों की पहुँच इस गांव तक भी थी. भोले-भाले ग्रामीणों को इन स्वार्थी तत्वों ने भ्रमित कर दिया. परिणाम यह रहा कि इस गाँव के बच्चों को निशुल्क शिक्षा मिलनी बंद हो गयी.

निरुत्साहित कर देने वाले ढेर सारे प्रयासों के बाद भी आनंदवाटिका के प्रयास ने अपनी निरंतरता बनाए रखी. हां, जलवालगांव और मदननेगी के स्थान पर इस विद्यालय की गतिविधियों का केंद्र धीरे-धीरे अर्थात दो माह के भीतर रजाखेत के पास भौन्याड़ा ग्राम बनता चला गया. इस गांव के निवासियों का सहयोग गुरुकुलम के कार्य को आज भी निरंतर आगे बढ़ा रहा है. इस गांव में आरंभ में 25 बच्चे थे जो बाद में घटकर दस रहा गए. लेकिन अब बच्चों की संख्या 40 के पास पहुँच चुकी है. पठान-पाठन के लिए अतिथि शिक्षकों के आवागमन के फलस्वरूप बच्चों की संख्या बढी है. दो ज्ञानी अतिथि शिक्षकों – राजन श्रीवास्तव (झारखंड) और विवेक मुरारका (पश्चिम बंगाल) का उल्लेख आवश्यक है. इन दो शिक्षकों ने आनंदवाटिका की शिक्षा पद्ध्वति को नि:संदेह नए आयाम दिए हैं.

आनंदवाटिका ग्रीन गुरुकुलम अपने विद्यार्थियों के व्यक्तित्व को निखारकर उन्हें जीवन-कला में पारंगत करने का निरंतर प्रयास कर रहा है, ताकि छात्र अपने जीवन की किसी भी प्रतियोगिता में पीछे नहीं रहें. स्कूल और पाठ्यक्रम से इतर शिक्षा के माध्यम से यह लक्ष्य प्राप्त करने का प्रयास है.

इस एक वर्ष की अवधि में आनंदवाटिका ग्रीन गुरुकुलम ने श्रीमती अनीता नौटियाल के शैक्षिक नेतृत्व में जो प्रयास किये हैं, उनमें प्रमुख हैं:

  1. गुरुकुल पद्ध्वति के साथ-साथ ग्रीन विचार-दर्शन और मूल्यों का परिपालन.
  2. पूर्णरूप से निशुल्क शिक्षा निर्भय और मुक्त वातावरण में. अर्थात, छात्र-छात्राओं के साथ व्यवहार करते समय मान-सम्मान और मर्यादा का पूरा ध्यान.
  3. अंग्रेजी माध्यम में गुणवत्तायुक्त शिक्षा की खोज में हो रहे अनिच्छित पलायन पर अंकुश लगाने के प्रयास. यदि ग्रामीणों को अपने बच्चों के लिए अंग्रेजी माध्यम में गुणवत्तायुक्त नि:शुल्क शिक्षा अपने आस-पास ही मिल जाए तो वे शहरों-कस्बों की ओर पलायन नहीं करेंगे.
  4. अच्छी और निशुल्क शिक्षा के माध्यम से गांवों से पलायन पर अंकुश लगाने के प्रयास के साथ-साथ कृषि, बागवानी, स्थानीय पारिस्थितिकी और पर्यावरण बचाने के भी प्रयास. फलस्वरूप, गांवों की जनसंख्या बढ़ेगी, जिसका अर्थ होगा कारोबार-व्यापार और रोजगार के अधिक अवसर.
  5. आनंद वाटिका ऐसे व्यवसाय और व्यापार का समर्थन भी कर रहा है जो ईमानदार, पारदर्शी और ग्रीन विचारों के अनुरूप संचालित हैं.
  6. शिक्षा-दीक्षा आयु और समझदारी के अनुरूप हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं में दी जा रही है.
  7. छात्र-छात्राओं की मातृभाषा को भी उचित स्थान दिया जा रहा है.
  8. आनंदवाटिका सस्ती, सुगम और नि:शुल्क सरकारी शिक्षा व्यवस्था को संरक्षित रखने और उसे बचाने के काम में भी लगा है. इसीलिए, “स्कूल और पाठ्यक्रम के अतिरिक्त शिक्षा” की अवधारणा पर काम कर रहा है. सरकारी स्कूल जिन विषयों को समय के अभाव या किसी अन्य कारण से पूरा नहीं कर पाते हैं, उन्हें आनंदवाटिका ग्रीन गुरुकुलम पूरा करने के प्रयास में लगा है.
  9. छात्रों को पारंपरिक और लोक-ज्ञान-विज्ञान का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है और उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे इसे अपने जीवन में साकार करें यथा घराट और धारों-नौलों का ज्ञान.
  10. बच्चों को कूड़ा-कचरा प्रबंधन की शिक्षा दी जाती है ताकि वे आस-पास का वातावरण और पर्यावरण स्वच्छ रख सकें.
  11. रसोई में भोजन इत्यादि बनाने के दौरान जमा होने वाले कचरे को कैसे जैविक खाद में परिवर्तित किया जा सकता है, इसका प्रशिक्षण भी बच्चों को दिया जाता है.
  12. उत्तराखंड की संस्कृति, लोक-परंपराओं के साथ-साथ लोक-भाषाओं और लोक-व्यवहार के संरक्षण में विद्यार्थियों की सहायता की जा रहा है.
  13. छात्रों को नियमित रूप से रचनात्मक गतिविधियों में लगाया जाता है.
  14. छात्र-छात्राओं को लोक संगीत -- ढोल, दमाऊं, रणसिंघा, थाली, हुड़का इत्यादि – और लोक-गीत और नृत्यों इत्यादि में प्रशिक्षित करने का संकल्प भी है ताकि सांस्कृतिक पक्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए संचित रहे.
  15. छात्र-छात्राओं को प्रेरणादायक फिल्में दिखाई जा रही हैं.
  16. स्थानीय महिलाओं को दैनिक जीवन में काम आने वाले कौशल में प्रशिक्षित किया जा रहा है. और,
  17. आनंदवाटिका के मिशन, उद्देश्यों और कार्यप्रणाली में शिक्षकों को दक्ष किया जा रहा है ताकि वे आनंद वाटिकापरंपरा को आगे ले जा सकें.

पिछले अनेक वर्षों से प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत शिक्षाविद अनीता नौटियाल गुजरात के अनेक विद्यालयों में पढ़ाने और उनका पाठ्यक्रम तैयार करने का अनुभव प्राप्त करने के पश्चात् अब उत्तराखंड को अपनी सेवाएं दे रही हैं, क्योंकि अपने राज्य में वह शिक्षा के क्षेत्र में कुछ नये प्रयोग करना चाहती थीं.

काशीपुर के एक स्कूल में वह डेढ़ वर्ष के आस-पास अकेडेमिक डीन रहीं और इसके पश्चात ऋषिकेश में एक अंग्रेजी प्राइमरी स्कूल की प्रधानाचार्य बनीं और इस नए स्कूल को शीघ्र ही प्रतिष्ठित स्कूलों की श्रेणी में ला खड़ा किया. इस स्कूल को उन्होंने ग्रीन स्कूल बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. ग्रीन स्कूल का अर्थ है – छात्र-छात्राओं को पर्यावरण के प्रति जागरूक और समाज के प्रति जिम्मेदार बनाना.

शिक्षिका होने के साथ-साथ अनीताजी की रुचि सामाजिक कार्यों में भी है. अनीता का विचार है कि यदि सब मिलकर स्थानीय परंपराओं के अनुरूप इन उद्देश्यों को प्राप्त करने में सफल होते हैं तो आनंदवाटिका ग्रीन गुरुकुलम नए प्रकार की शिक्षा में एक उदाहरण प्रस्तुत कर सकेगा.

गत वर्ष 5 सितंबर को अध्यापक दिवस के अवसर पर मदननेगी में सुंदर कार्यक्रम का आयोजन किया गया. बच्चों ने इस अवसर पर पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन का चित्र भी बनाया तथा कविता-पाठ के साथ-साथ भाषण इत्यादि का आयोजन भी किया गया. श्रीमती अनीता नौटियाल इस बात का नाट्य-रूपांतरण कि शिक्षकों द्वारा पढ़ाते समय छात्र किस प्रकार का व्यवहार करते हैं.

आनंदवाटिका ने इग्नू (इंदिरा गांधी नैशनल ओपन यूनिवर्सिटी ) के सहयोग से प्राइमरी अध्यापकों को प्रशिक्षित करने का पाठ्यक्रम अर्थात नर्सरी टीचर ट्रेनिंग (एनटीटी) भी आरंभ किया है. इस विचार का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर प्राथमिक शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाना है.

इस वर्ष 12 से 18 जून तक थियेटर कार्यशाला का आयोजन भी किया गया लेकिन कारणवश यह सफल नहीं रही. रंजन श्रीवास्तव ने जो प्रोजेक्टर आनंदवाटिका को उपहार में दिया उसकी सहायता से बच्चों को अनेक प्रेरणाप्रद फ़िल्में दिखाई जा चुकी हैं.

अब इस वर्ष दिसंबर माह में स्थानीय विद्यालयों के सहयोग से विज्ञान सप्ताह का आयोजन करने का विचार है. जल दर्शन के विभीन पक्षों पर इस दौरान चर्चा और संवाद होंगे. इंटर कॉलेज रजाखेत और स्थानीय शिवालिक स्कूल का इस कार्यक्रम में विशेष सहयोग रहेगा.

अंत में इतना ही कि निरंतरता बनी रहेगी तो आनंदवाटिका का विचार क्षेत्र में खूब फलेगा और फूलेगा. श्रीमती अनीता नौटियाल भी ऐसा ही सोचती हैं तथा इस विशेष विद्यालय को और आगे ले जाने का सपना बन रही हैं. उनकी टीम पूरी तरह से उनके पीछे है.